कहानी - 1 (कक्षा 9वीं स्पर्श)
यशपाल
यशपाल की यह कहानी समाज में व्याप्त अंधविश्वासों और ऊँच-नीच के भेद-भाव को बेनकाब करते हुए यह बताती है कि दुःख की अनुभूति सभी को समान रूप से होती है। कहानी धनी लोगों की अमानवीयता और गरीबों की मजबूरी को भी पूरी गहराई से उजागर करती है।
इस इंटरैक्टिव पाठ में हम यशपाल के जीवन, उनकी कहानी की विषयवस्तु और समाज में व्याप्त सामाजिक असमानता का विस्तृत अध्ययन करेंगे। हम जानेंगे कि कैसे कहानीकार ने समाज की कुरीतियों पर तीखा व्यंग्य किया है।
यह पाठ न केवल सामाजिक समानता के महत्व को प्रस्तुत करता है, बल्कि मानवीय संवेदना और दुःख के अधिकार के बारे में भी गहराई से सोचने पर मजबूर करता है।
पाठ में प्रयुक्त शब्दों के संदर्भ और उनके अर्थ को समझिए:
"अनुभूति" का अर्थ है:
"व्यवधान" का अर्थ है:
"बेहया" का अर्थ है:
"सूतक" का अर्थ है:
"निर्वाह" का अर्थ है:
निम्नलिखित शब्द-युग्मों और शब्द-समूहों के लिए सही वाक्य चुनिए:
1. छन्नी-ककना
2. दुअन्नी-चवन्नी
3. फफक-फफककर
4. झाड़ना-फूँकना
5. लिपट-लिपटकर
निम्नलिखित वाक्यों के आशय पर चिंतन कीजिए और अपना विचार व्यक्त कीजिए:
निम्नलिखित में से किसी एक विषय पर अपने विचार व्यक्त कीजिए:
यशपाल (1903-1976)
यशपाल का जन्म फिरोजपुर छावनी में सन् 1903 में हुआ। इन्होंने आरंभिक शिक्षा स्थानीय स्कूल में और उच्च शिक्षा लाहौर में पाई। यशपाल विद्यार्थी काल से ही क्रांतिकारी गतिविधियों में जुट गए थे। अमर शहीद भगतसिंह आदि के साथ मिलकर इन्होंने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लिया।
यशपाल की प्रमुख कृतियाँ: देशद्रोही, पार्टी कामरेड, दादा कामरेड, झूठा सच तथा तेरी, मेरी, उसकी बात (सभी उपन्यास), ज्ञानदान, तर्क का तूफ़ान, पिंजड़े की उड़ान, फूलों का कुरता, उत्तराधिकारी (सभी कहानी संग्रह) और सिंहावलोकन (आत्मकथा)।
साहित्यिक विशेषताएँ: यशपाल की कहानियों में कथा रस सर्वत्र मिलता है। वर्ग-संघर्ष, मनोविश्लेषण और पैना व्यंग्य इनकी कहानियों की विशेषताएँ हैं। 'तेरी, मेरी, उसकी बात' पर यशपाल को साहित्य अकादेमी पुरस्कार मिला।